Cough Syrup Tragedy: India's Urgent Inspection After 14 Child Deaths
भारत में कफ सिरप से बच्चों की मौतें — त्रासदी जिसने देश को झकझोरा
भारत में 14 बच्चों की दुखद मौतों की ताज़ा रिपोर्टों ने दवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये त्रासदियाँ, जो मिलावटी कफ सिरप से जुड़ी बताई जा रही हैं, ने भारत सरकार को तुरंत कार्रवाई करने और दवा निर्माण विधियों की जाँच के लिए कई राज्यों में निरीक्षण करने के लिए प्रेरित किया है। यह नाटकीय घटना न केवल अनियंत्रित दवाओं के जोखिम को दर्शाती है, बल्कि पूरे देश में दवा सुरक्षा कानूनों में सुधार की माँग करती है।
घटना की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश और राजस्थान में, कई बच्चों की मौतों का कारण कफ सिरप: कॉल्ड्रिफ और नेक्स्रोस डीएस को माना गया है। ये मौतें इतनी भयावह थीं कि केंद्र सरकार ने छह राज्यों में 19 दवा निर्माण इकाइयों पर छापे मारे हैं। जिन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, उनमें काइसन फार्मा भी शामिल है, जिस पर इन घटनाओं के बाद पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।
काइसन फार्मा की भूमिका
एनडीटीवी की रिपोर्टों के अनुसार, काइसन फार्मा की कड़ी आलोचना हो रही है। सुरक्षा मानकों का पालन न करने और लीपापोती की खबरें दवा उद्योग में एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती हैं, जो उपभोक्ताओं, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
दूषित कफ सिरप में पाए गए जहरीले रसायन
निरीक्षणों में पाया गया कि कफ सिरप के नमूनों में डायएथिलीन ग्लाइकॉल का उच्च स्तर मौजूद था — यह वही रसायन है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने खतरनाक घोषित किया है। इस रसायन के कारण गुर्दे की क्षति, तंत्रिका तंत्र की समस्या और गंभीर मामलों में मृत्यु जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।
डायएथिलीन ग्लाइकॉल क्या है?
-
रासायनिक संरचना: यह गंधहीन, हल्के रंग का तरल है जिसका उपयोग औद्योगिक विलायक के रूप में किया जाता है।
-
स्वास्थ्य जोखिम: इसके सेवन से किडनी और नर्व सिस्टम को नुकसान होता है और यह जानलेवा साबित हो सकता है।
सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए दवा निर्माण इकाइयों पर छापेमारी और निरीक्षण शुरू किए हैं। स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं, जबकि मीडिया संस्थान जैसे NDTV और Times of India लगातार इस मामले की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
ज़मीनी स्तर से दुखद रिपोर्टें
अस्पतालों की रिपोर्टों के अनुसार, दूषित सिरप पीने वाले अधिकांश बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएँ हुईं। नागपुर में इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत ने देश को हिला दिया। ऐसी घटनाएँ नियामक विफलता और दवा सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर करती हैं।
दवा नियामक सुधारों की माँग
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में दवा सुरक्षा नियमों को और सख्त करने की ज़रूरत है। सुझावों में शामिल हैं:
-
कड़े निरीक्षण: हर दवा निर्माण इकाई की नियमित जांच।
-
पारदर्शिता रिपोर्टिंग: दवा कंपनियों में जवाबदेही और खुलापन।
-
जन शिक्षा: आम जनता को दवा जोखिमों के बारे में जागरूक करना।
निष्कर्ष
इन 14 बच्चों की मौतें हमें याद दिलाती हैं कि दवा सुरक्षा कोई विकल्प नहीं बल्कि जरूरी जिम्मेदारी है। सरकार की तेज़ कार्रवाई उम्मीद जगाती है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियाँ रोकी जा सकेंगी।
(अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. भारत में कफ सिरप से बच्चों की मौत का मुख्य कारण क्या था?
दूषित कफ सिरप में पाया गया डायएथिलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला रसायन मुख्य कारण था।
2. सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
भारत सरकार ने कई दवा निर्माण इकाइयों पर छापेमारी की है और दवा सुरक्षा निरीक्षण को मजबूत किया है।
आपको क्या लगता है — क्या भारत में दवा सुरक्षा कानूनों को और सख्त बनाया जाना चाहिए?
नीचे कमेंट करें, अपनी राय साझा करें और इस खबर को शेयर करें ताकि जागरूकता बढ़े।
iPhone 17 सीरीज़ लॉन्च 2025: डिजाइन, फीचर्स और कीमत का पूरा विवरण



0 टिप्पणियाँ
IF ANY DAUT LAT ME KNOW